Tuesday, 13 March 2012

गीत

सिनेहक आइरि पर रोपल ब्यथा,
सब बिसरि गेलहु कि मोने अछि,
यै मनिनि मानक अपन कथा,
सब बिसरि गेलहु कि मोने अछि,...

जहिया भेंट भेल रहि आहा,
सोझा मे लजायल ठाढ़ रहि आहा,
पहिलुक मिलन के सब कथा,
सब बिसरि गेलहु कि मोने अछि,...

डेग धरि जे मचलि धरती पर,
सोझे लट आबी जय कटी पर,
किछु अहू कहु प्रिये अपन ब्यथा,
सब बिसरि गेलहु कि मोने अछि,...

अयना लग ठाढ़ कखनो दौरि दुआरि पर,
रहि-रहि नजरि आहक जाय छल चार पर,
कौआ स' पूछने रहि हमर कथा,
सब बिसरि गेलहु कि मोने अछि,...

आंखिक कोर इंद्रधनुषी कमान सन,
ताकथि कि चलय लागय जेना बाण सन,
'गुंजन' हुनकर आंखिक ओ ब्यथा
सब बिसारी गेलहु कि मोने अछि,...
 

Sunday, 11 March 2012

ग़जल

गजल
धारक कात रहितो पियासल रहि गेल जिनगी हमर।
मोनक बात मोनहि रहल, दुख सहि गेल जिनगी हमर।

मुस्की हमर घर आस लेने आओत नै आब यौ,
पूरै छै कहाँ आस सबहक, कहि गेल जिनगी हमर।

सीखेलक इ दुनिया किला बचबै केर ढंगो मुदा,
बचबै मे किला अनकरे टा ढहि गेल जिनगी हमर।

पाथर बाट पर छी पडल, हमरा पूछलक नै कियो,
कोनो बन्न नाला जकाँ चुप बहि गेल जिनगी हमर।

जिनगी "ओम" बीतेलकै बीचहि धार औनाइते,
भेंटल नै कछेरो कतौ, बस दहि गेल जिनगी हमर।
(बहरे मुक्तजिब)