फरेब देगी भला और क्या सेहर मुझ को
जगाये रखा है ख्वाबों ने रात भर मुझ को
तलाश -ए-आब में जो मंजिल -ऐ-शराब में है
करिश्मा सजी -ऐ -फितरत है वोह नज़र मुझ को
माता -ऐ -हुस्न -ऐ -तजल्ली पे भी मेरा हक है
अता हुई है अगर रफत -ऐ -नज़र मुझ को
में अपने फेन में तेरे हुस्न का ही पैकार हूँ
न देख ऐसे के लग जाये फिर नज़र मुझ को
कभी तो तेरी बुलंदी का राज़ मुझ पे खुले
कभी झिंझोड़े तो एहसाश -ऐ -बाल -ओ -पर मुझ को
तिलिस्म टूट रहा है तेरी हकीकत का
दोहाई देने लगा है मेरा हुनर मुझ को
सजी जाने लगी है सलीब फिर मंज़र
कहा न जाये कहीं फिर पयम्बर मुझ को
चमन में क्यों में जालौन बहार -ऐ -गुल के चारघ
के ढूंढ लेंगें अंधेरों में दीदाह्वर मुझ को
भटक रहा हूँ इधर में किरण किरण के लिए
तलाश करने चली है उधर सेहर मुझ को
जगाये रखा है ख्वाबों ने रात भर मुझ को
तलाश -ए-आब में जो मंजिल -ऐ-शराब में है
करिश्मा सजी -ऐ -फितरत है वोह नज़र मुझ को
माता -ऐ -हुस्न -ऐ -तजल्ली पे भी मेरा हक है
अता हुई है अगर रफत -ऐ -नज़र मुझ को
में अपने फेन में तेरे हुस्न का ही पैकार हूँ
न देख ऐसे के लग जाये फिर नज़र मुझ को
कभी तो तेरी बुलंदी का राज़ मुझ पे खुले
कभी झिंझोड़े तो एहसाश -ऐ -बाल -ओ -पर मुझ को
तिलिस्म टूट रहा है तेरी हकीकत का
दोहाई देने लगा है मेरा हुनर मुझ को
सजी जाने लगी है सलीब फिर मंज़र
कहा न जाये कहीं फिर पयम्बर मुझ को
चमन में क्यों में जालौन बहार -ऐ -गुल के चारघ
के ढूंढ लेंगें अंधेरों में दीदाह्वर मुझ को
भटक रहा हूँ इधर में किरण किरण के लिए
तलाश करने चली है उधर सेहर मुझ को
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