Monday, 27 February 2012

ग़जल

सुराख  दुध्ती   है  दुनिया  पाक  दामन मे ,
दाग  न  हो  जिसमे  वो  कौनसा  महताब  लायें ,,

कुछ  किये  बिना  ही  तुझसा  मशहूर  हो  जायें ,
बताओ  की  कहाँ  से  हम  पर  ए सुरखाब  लायें ,,

सुनहरी  चेहरों  की  महफ़िल  मे  शरीक  होने को ,
सोचते  हैं  हम  भी  कभी  सोने  का  नकाब  लायें ,,

सुना  हैं  तुम  हसीं  सपने  बेचते  हो ,
देखें  सौदागिरी  तेरी  खरीद  हम  ख़्वाब  लायें ,,

जिंदगी  मह्खानो  की  उधार  है  मुझपे ,
'निशांत ' जीने  को  कहाँ से  शराब  लायें ,,

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